J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)







We Want Security


There is the desire for security. And one can understand this desire to be secure when you meet a wild animal, a snake; or you watch when you cross the road. But there is no other form of security. Really,if you look at it, there is no other form. You would like to have security with your wife, children, neighbor, your relations—if you have relations—but you don't have it. You may have your mother, you may have your father, but you are not related, you are completely isolated— we will go into that.

हम सुरक्षा चाहते हैं


हममें सुरक्षण की इच्छा रहती है | आप इस इच्छा को तब समझ सकते हैं जब आपका सामना किसी वन्य पशु या सर्प से हो जाता है या सड़क पार करते हुए जब आप एकदम चौकस हो जाते हैं | परंतु सुरक्षा का कोई अन्य स्वरुप नहीं होता | आप अपनी पत्नी के साथ, बच्चों के साथ संबंधों में -- यदि आपके संबंध है तो -- सुरक्षा पाना चाहते हैं, परंतु आपको वह मिल नहीं पाती | आपके माता या पिता आपके साथ हो सकते हैं परंतु साथ होते हुए भी आप उनके साथ नहीं होते, आप पूरी तरह अकेले होते हैं |

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Question: How can we be free from indignation?


Krishnamurti: What do you mean by indignation? You mean when a man beats a heavily laden donkey, you feel angry? You say you feel righteously angry when some big man beats a little boy. Is there such a thing as righteous indignation?

प्रश्न : रोष से मुक्त होने का क्या तरीका है?


कृष्णमूर्ति : रोष से आपका आशय क्या है? क्या आपका आशय यह है कि जब कोई आदमी भारी बोझ से लदे गधे को पीटता है तो उसे देखकर आपको गुस्सा आता है? आप कहते हैं कि जब कोई बड़ा आदमी किसी छोटे से बच्चे को पीटता है तो आपको गुस्सा आना उचित है | क्या उचित क्रोध जैसी कोई चीज़ वास्तव में होती है?

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व्यक्ति का सर्वोच्च महत्व है


व्यक्ति का सर्वोच्च महत्व है, भले ही समाज, धर्म और सरकार इस तथ्य को मान्यता नहीं देते | आप अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आप यथार्थ की विस्फोटक सर्जनात्मकता को लाने वाले एकमात्र साधन हैं | आप स्वयं ही वह वातावरण हैं जिसमें यथार्थ अस्तित्व में आ सकता है | लेकिन आप देख चुके हैं कि सभी सरकारें, सभी संगठित धर्म और समाज व्यक्ति के महत्व पर ज़ोर देते हुए भी व्यक्ति के मर्म, व्यक्ति की भावनाओं को मिटाने की कोशिश करते हैं, क्योंकि वे सामूहिक भावदशा, सामूहिक प्रतिक्रिया चाहते हैं |

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Love Cannot Be Thought About


You can think about a person whom you love, but you can-not think about love. Love cannot be thought about; though you may identify yourself with a person, a country, a church, the moment you think about love, it is not love—it is merely mentation...

प्रेम के विषय में सोचा नहीं जा सकता


आप उस व्यक्ति के बारे में सोच सकते हैं जिसे आप प्रेम करते हैं, परंतु आप प्रेम के बारे में नहीं सोच सकते | प्रेम को सोचा नहीं जा सकता | भले ही किसी व्यक्ति, किसी देश, किसी पूजास्थल के साथ आप अभिन्नभाव रखते हों, परंतु जिस पल आप प्रेम के बारे में सोचते हैं वह प्रेम होता ही नहीं है -- वह तो केवल एक मानसिक प्रक्रिया होती है...

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Comparison and Competition, or Cooperation?


One of the things that prevents the sense of being secure is comparison. When you are compared with somebody else in your studies or in your games or in your looks, you have a sense of anxiety, a sense of fear, a sense of uncertainty. So, as we were discussing yesterday with some of the teachers, it is very important to eliminate in our school this sense of comparison, this giving grades or marks,and ultimately the fear of examinations...

तुलना, स्पर्धा या सहयोग?


एक बात जो सुरक्षित होने के भाव में आड़े आती है वह है तुलना| जब आपकी तुलना किसी दूसरे से की जाती है -- आपकी पढ़ाई के बारे में, आपके खेलकूद के बारे में अथवा आपके रूप या चेहरे के बारे में -- तब आप व्यग्रता, घबराहट और अनिश्चितता के भाव से भर जाते हैं | इसलिए जैसा की कल हम कुछ अध्यापकों के साथ चर्चा कर रहे थे, यह नितांत आवश्यक है की हमारे विद्यालय में तुलना का यह एहसास, यह अंक या श्रेणी देना और सबसे बड़ा तो परीक्षा का भूत समाप्त किया जाए |

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