J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)



To live our daily life without a single problem.


We are like two friends sitting in the park on a lovely day talking about life, talking about our problems, investigating the very nature of our existence, and asking ourselves seriously why life has become such a great problem, why, though intellectually we are very sophisticated, yet our daily life is such a grind, without any meaning, except survival - which again is rather doubtful. Why has life, everyday existence, become such a torture? We may go to church, follow some leader, political or religious, but the daily life is always a turmoil, though there are certain periods which are occasionally joyful, happy, there is always a cloud of darkness about our life. And these two friends, as we are, you and the speaker, are
talking over together in a friendly manner, Perhaps with affection, with care, with concern, whether it is at all possible to live our daily life without a single problem.

दैनिक जीवन बिना किसी भी समस्या के जीना संभव हैं |


हम एक सुहावने दिन किसी उद्यान में बैठे हुए दो मित्रों कि तरह हैं -- जीवन के बारे में अपनी समस्यों के बारे में बातचीत करते हुए, अपने अस्तित्व की प्रकृति का अन्वेषण करते हुए, और बड़ी गंभीरता से अपने-आप से पूछते हुए कि जीवन ऐसी गंभीर समस्या क्यों बन गया है, बौद्धिक रूप से हमारे बहुत परिष्कृत होने के बावजूद हमारा दैनिक जीवन एक चक्की जैसा क्यों बन गया है, बिना किसी अर्थ के बस जिंदा रहें सिर्फ इसलिए -- और उसका भी भला क्या भरोसा | यह जीवन, हमारा दैनंदिन अस्तित्व इस कदर यातनामय क्यों हों गया है ? हम भले ही चर्च में जाएं, किसी राजनीतिक या धार्मिक नेता का अनुसरण करें, पर हमारा दैनिक जीवन हमेशा विक्षुब्ध ही रहता है; और संजोग से खुशी के, आनंद के कुछ अवसर नसीब भी हो जाते हैं, तो भी सियाही का एक बादल हमारे जीवन पर मंडराता ही रहता है | और ये दो मित्र -- आप और मैं -- मैत्रीपूर्ण ढंग से विचार-विमर्श कर रहे हैं, शायद बड़े स्नेह से बिना किसी हडबड़ी के, इस सरोकार के साथ कि क्या अपना दैनिक जीवन बिना किसी भी समस्या के जीना संभव हैं भी?

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Is God An Invention?


What would you say if you were not conditioned by your religion, by your fears; what would you say about God? Of course, God is a marvellous investment—you can preach about God and you will make a lot of money—as they are doing.

क्या मनुष्य ने ईश्वर को गढ़ लिया है?


इसे आप क्या कहेंगे, यदि आप अपने धर्म, अपने भय के द्वारा अनुकूलित नहीं होते तो आप भगवान के बारे में क्या कहते? जी हां, बिलकुल, भगवान एक आश्चर्यजनक निवेश है--आप भगवान के बारे में प्रवचन कर सकते हैं और इससे आप बहुत अधिक धन कमाँ लेंगे-- जैसे की लोग कर रहे हैं |

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Question: A gentleman asks how far do you agree with Shankara who says, ‘Eliminate the mind completely’?


Krishnamurti: Not having read Shankara, I cannot answer. But I think it is very important to find out for ourselves and not repeat Shankara or Buddha. The difficulty with most of us is that we have read, we know what other people have said, but we do not know at all what we ourselves think.

प्रश्न : एक महानुभाव पूछते हैं – शंकर के इस कथन से आप कितना सहमत हैं कि मन को पूर्ण रूप से मिटा दिया ..


कृष्णमूर्ति: चूंकि मैंने शंकर को नहीं पढ़ा है इसलिए इस प्रश्न का उत्तर देना मेरे लिए संभव नहीं है | परंतु मैं यह सोचता हूं कि हमारे लिए महत्त्वपूर्ण यह होगा कि हम शंकर अथवा बुद्ध के वचनों को दोहराने के बदले स्वयं ही इस बारे में पता लगाएं |

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उस शब्द में वह सब सन्निहित है |


वे चीज़ें जिन्हें विचार ने पावनता के रूप में गढ़ा है, पावन नहीं हैं | वे तो जीवन को कोई सार्थकता दे देने के लिए प्रदत्त शब्द मात्र हैं, क्योंकि जैसे जीवन जी रहे हैं, वह तो पावन नहीं है, पवित्र नहीं है, पवित्र शब्द तो समग्र से आता है, जिसका अर्थ है स्वस्थ, संतुलित, अतएव पवित्र | उस शब्द में वह सब सन्निहित है |

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