J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)



The Still Mind


And it is only a very still mind not a disciplined mind, that has understood and therefore is free. It is only that still mind that can know what is creation. Because the word God has been spoiled...

शांत व स्थिर मन


अनुशासनबद्ध मन नहीं बल्कि केवल शांत मन ही समझ पता है, और इसीलिए वह मुक्त हो रहता है | केवल ऐसा शांत मन ही जान सकता है की सृजन क्या होता है, क्योंकि 'ईश्वर' शब्द तो विकृत किया जा चुका है |

Read more >>

Self-Pity Is a Factor of Sorrow


Self-pity is when you complain about yourself unconsciously or consciously, when you are pitying yourself, when you say, "I can't do anything against the environment in which I am, placed as I am;" when you call yourself a pest, bemoaning your own lot. And so there is sorrow.

अपने आप पर तरस खाना दुःख का कारक होता है


अपने आप पर तरस तब आता है जब चेतन या अचेतन रूप से आप अपने आप से खुद के बारे में ही शिकायत कर रहे होते है, जब आपको स्वयं पर दया आ रही होती है, जब आप कह उठते है, "जिन परिस्थितियों में, जिस स्थिति में मैं रह रहा हूँ उसके विरुद्ध में कुछ भी नहीं कर सकता |" जब आप स्वयं को एक कीड़ा मान रहे होते है; अपने भाग्य को कोस रहे होते है -- इस प्रकार प्रवेश कर लेता है दुःख |

Read more >>

Prejudice has something in common


Prejudice has something in common with ideals, beliefs and faiths. We must be able to think together; but our prejudices, our ideals and so on, limit the capacity and the energy required to think, to observe and examine together so as to discover for ourselves what lies behind
all the confusion, misery, terror, destruction and tremendous violence in the world.

पूर्वाग्रहों में और आदर्शों, विश्वासों, आस्थाओं में कुछ समानता हुआ करती है |


पूर्वाग्रहों में और आदर्शों, विश्वासों, आस्थाओं में कुछ समानता हुआ करती है | पूर्वाग्रह, आदर्श और ऐसी तमाम बातें, मिलजुल कर सोचने, देखने-परखने की हमारी क्षमता तथा ऊर्जा को प्रतिबंधित कर देती हैं, सीमित कर देती हैं, और इस कारण हम यह पता नहीं कर पाते हैं की इस संसार मैं फैले विभ्रम, पीड़ा, आतंक, विनाश तथा भयानक हिंसा आदि के पीछे असल मुद्दा क्या है |

Read more >>    top of page ↑

To Think We Own a Human Being Makes Us Feel Important


Jealousy is one of the ways of holding the man or the woman, is it not? The more we are jealous, the greater the feeling of possession. To possess something makes us happy; to call something, even a dog, exclusively our own makes us feel warm and comfortable. To be exclusive in our possession gives us assurance and certainty to ourselves. To own something makes us important; it is this importance we cling to.

यह सोचना की मैं किसी का स्वामी हूँ, हमें महत्त्वपूर्ण होने का एहसास देता है


ईर्ष्या किसी पुरुष या किसी स्त्री को अपने स्वामित्व में बनाये रखने का एक ढंग है | हम जितने अधिक ईर्ष्यालु होंगे, हमारा स्वामित्वभाव उतना ही प्रबल होगा | अपने स्वामित्व में किसी को रखने से हमें ख़ुशी मिलती है, किसी पर, यहाँ तक की कुत्ते पर भी, अपना एकाधिकार जताना हमें भला और सुखद लगता है | उस पर अपना एकमेव स्वामित्व हमें सुनिश्चितता और आत्मविश्वास से भर देता है | किसी का स्वामी होना हमें महत्त्वपूर्ण बना देता है और यह महत्वपूर्ण होना ही है जिससे हम चिपके रहते है |

Read more >>    top of page ↑