J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)



Question: How can we remove our defects forever?


Krishnamurti: You see how the mind wants to be secure. It does not want to be disturbed. It wants forever and forever to be completely safe, and a mind that wants to be completely safe, to get over all difficulties forever and forever, is going to find a way.

प्रश्न : हम अपने दोषों को हमेशा के लिए कैसे दूर कर सकते हैं?


कृष्णमूर्ति : आप यह देख सकते हैं कि मन किस प्रकार से सुरक्षित रहना चाहता है | यह किसी प्रकार का व्यवधान नहीं चाहता | यह सदा-सदा के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित बना रहना चाहता है, और ऐसा मन जो पूरी तरह से सुरक्षित बना रहना चाहता है जो हमेशा के लिए अपनी कठिनाइयों को मिटा देना चाहता है, अवश्य ही इसके लिए कोई उपाय खोज लेगा |

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Self-Ending, Not Self-Improvement, Ends Suffering


One of the most difficult things to understand, it seems to me, is this problem of change. We see that there is progress in different forms, so-called evolution, but is there a funda mental change in progress? I do not know if this problem has struck you at all, or whether you have ever thought about it, but perhaps it will be worthwhile to go into the question this morning.

आत्म विकास नहीं अहं का अवसान दुःख का अंत करता है


मुझे लगता है की परिवर्तन की समस्या को समझना अत्यंत कठिन हैं | हम देखते है की चारों ओर नाना प्रकार की प्रगति हो रही है -- तथाकथित विकास हो रहा है, परंतु क्या इस प्रगति से मूलभूत परिवर्तन हो पा रहा है? मैं नहीं जानता की आपका ध्यान कभी इस समस्या पर गया है या नहीं, या अपने कभी इस विषय पर सोचा है या नहीं | आज सुबह इस प्रश्न पर विचार करना शायद उपयुक्त रहेगा |

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Self-Pity Is a Factor of Sorrow


Self-pity is when you complain about yourself unconsciously or consciously, when you are pitying yourself, when you say, "I can't do anything against the environment in which I am, placed as I am;" when you call yourself a pest, bemoaning your own lot. And so there is sorrow.

अपने आप पर तरस खाना दुःख का कारक होता है


अपने आप पर तरस तब आता है जब चेतन या अचेतन रूप से आप अपने आप से खुद के बारे में ही शिकायत कर रहे होते है, जब आपको स्वयं पर दया आ रही होती है, जब आप कह उठते है, "जिन परिस्थितियों में, जिस स्थिति में मैं रह रहा हूँ उसके विरुद्ध में कुछ भी नहीं कर सकता |" जब आप स्वयं को एक कीड़ा मान रहे होते है; अपने भाग्य को कोस रहे होते है -- इस प्रकार प्रवेश कर लेता है दुःख |

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The Brain


We have to consider together whether the brain, which is now only operating partially, has the capacity to function wholly, completely. Now we are only,using a part of it, which one can observe for oneself. One can see that specialization, which may be necessary, brings about the functioning of only a part of the brain. If one is a scientist, specializing in that subject, naturally only one part of the brain is functioning; if one is a mathematician it is the same. In the modern world one has to specialize, and we are asking whether, even so, it is possible to allow the brain to operate wholly, completely.

मस्तिष्क


हमें साथ-साथ विचार-विमर्श करना है कि इस समय आंशिक रूप से कार्य कर पा रहे मस्तिष्क में क्या समग्र रूप से, संपूर्ण रूप से कार्य करने की क्षमता है | इस समय हम उसके केवल एक अंश का ही उपयोग कर रहे हैं, यह हम स्वयं देख सकते हैं | विशेषज्ञता भले ही आवश्यक हो, पर उससे मस्तिष्क आंशिक रूप से कार्य करने लगता है यह बात कोई भी देख सकता है | यदि कोई वैज्ञानिक है और उसने किसी विषय का विशेषज्ञता प्राप्त की है तो स्वभावतः उसके मस्तिष्क का एक अंश ही कार्यरत रहता है | यदि कोई गणितज्ञ है तो उसके बारे में भी ठीक ऐसा ही होगा | आधुनिक विश्व में इस प्रकार की विशेषज्ञता आवश्यक हो गयी है, और हम पूछ रहे हैं की क्या ऐसी स्थिति में भी मस्तिष्क को समग्र रूप से, पूर्ण रूप से कार्य करने देना संभव है |

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