J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)






व्यक्ति का सर्वोच्च महत्व है


व्यक्ति का सर्वोच्च महत्व है, भले ही समाज, धर्म और सरकार इस तथ्य को मान्यता नहीं देते | आप अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आप यथार्थ की विस्फोटक सर्जनात्मकता को लाने वाले एकमात्र साधन हैं | आप स्वयं ही वह वातावरण हैं जिसमें यथार्थ अस्तित्व में आ सकता है | लेकिन आप देख चुके हैं कि सभी सरकारें, सभी संगठित धर्म और समाज व्यक्ति के महत्व पर ज़ोर देते हुए भी व्यक्ति के मर्म, व्यक्ति की भावनाओं को मिटाने की कोशिश करते हैं, क्योंकि वे सामूहिक भावदशा, सामूहिक प्रतिक्रिया चाहते हैं |

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I would like to repeat


I would like to repeat that we are not trying to convince you of anything - that must be clearly understood. We are not trying to persuade you to accept a particular point of view. We are not trying to impress you about anything; nor are we doing any propaganda. We are not talking about personalities, or who is right and who is wrong, but rather trying to think out, to observe, together, what the world is and
what we are, what we have made of the world and what we have made of ourselves. We are trying together to examine both the inward and the outward man.

मैं फिर से दोहराना चाहूंगा


मैं फिर से दोहराना चाहूंगा कि हम आपसे किसी भी बात को मनवाना नहीं चाहते -- आपको यह पूर्णतः सपष्ट रूप से समझ लेना होगा | किसी विशिष्ट दृष्टिकोण को अपनाने के लिए आपको राज़ी करने की चेष्टा हम नहीं कर रहे हैं | किसी भी बात के बारे में आपको प्रभावित करना भी हम नहीं चाहते | और न ही हम कोई प्रचार कर रहे हैं | हम किन्हीं महापुरुषों की बात भी नहीं कर रहे हैं, और न ही कौन सही कौन गलत इस पर विचार-विमर्श कर रहे हैं | हम तो सब मिलकर यह पता करना चाह रहे हैं, देखना चाह रहे हैं कि यह संसार क्या है और हम क्या हैं, हमने इस विश्व को क्या बना दिया है और अपने-आपको क्या बना दिया है | हम सब साथ-साथ मनुष्य के भीतरी तथा बाहरी दोनों रूपों की जांच करना चाहते हैं |

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Discipline


Have you ever sat still? You try it sometime and see if you can sit very quietly, not for any purpose, but just to see if you can sit quietly. The older you grow, the more nervous, fidgety, agitated, you become. Have you noticed how old people keep jogging their legs?

अनुशासन


क्या आप कभी शांतिपूर्वक बैठे है? कभी इस प्रकार से बैठने का प्रयत्न करके देखिए – किसी प्रयोजन से नहीं, बस ऐसे ही – केवल यह जानने के लिए कि क्या आप शांतिपूर्वक बैठे सकते हैं | जैसे-जैसे आप बड़े होने लगते हैं आप और भी अधिक व्याकुल, अशांत और उद्विग्न रहने लगते हैं | क्या आपका ध्यान कभी इस पर गया है कि बड़े लोग किस तरह पैर हिलाते रहते हैं?

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प्राक्कथन


प्राक्कथन

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