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J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)
Envy
I do not know if you have found that fear is a very strange thing. Most of us have fear of some kind or another, and it lurks behind so many forms, it hides behind so many virtues.
ईर्ष्या
भय कितनी विचित्र चीज़ है, पता नहीं आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि नहीं | हममें से अधिकांश किसी-न-किसी प्रकार के भय से ग्रस्त रहते हैं और भय अपने आपको कई रूपों में छिपाए रहता है, यह अनेक सद्गुणों की आड़ में छुपा रहता है |
Where There Is Dependency, Attachment, There Is No Love
Psychologically, then, our relationships are based on dependence, and that is why there is fear. The problem is not how not to depend, but just to see the fact that we do depend.
जहाँ निर्भरता व आसक्ति हों, वहां प्रेम नहीं रह सकता
मनोवैज्ञानिक तौर पर हमारे संबंध निर्भरता पर आधारित रहते हैं और इसीलिए इनमें भय का वास रहता है | समस्या यह नहीं है कि निर्भर कैसे न रहें, हमें बस इस तथ्य को देखना है कि हम निर्भर हैं |
The Crisis Is In You
We are facing a tremendous crisis which the politicians can never solve. Nor can the scientists understand or solve the crisis, nor yet the business world, the world of money. The turning point is not in politics, in religion, in the scientific world; it is in our consciousness.
संकट आपके भीतर ही है |
हम एक भयानक संकट का सामना कर रहे हैं | इस संकट का निवारण करना राजनेताओं के बस की बात नहीं, क्योंकि वे सारे किसी विशिष्ट ढंग से चिंतन करने के लिए पूर्व नियोजित हैं; वैज्ञानिक लोग भी इस संकट का सामना नहीं कर पाएंगे; और न ही व्यापर जगत, न ही धन-दौलत इस मामले में कुछ कर पायेंगे | यह मोड़, यह बदलाव न तो राजनीति के बस की बात है, न ही धर्म के, और न ही विज्ञानं जगत के; यह मसला हमारी चेतना से जुड़ा हुआ है |
Anger Can Be Self-importance
Anger has that peculiar quality of isolation; like sorrow, it cuts one off, and for the time being, at least, all relationship comes to an end. Anger has the temporary strength and vitality of the isolated. There is a strange despair in anger; for isolation is despair.
क्रोध आत्म-महत्ता से संबंधित है
दुःख की भ्रान्ति क्रोध में भी अलग-थलग कर देने की वह विशेष क्षमता है जो व्यक्ति को सब से काट देती है, और कम से कम कुछ समय के लिए सभी संबंध समाप्त ही हो जाते है | यह क्रोध अलग-थलग व्यक्ति का अस्थायी शक्ति-स्रोत, उसका बल बन जाता है | क्रोध में एक विचित्र प्रकार की हताशा होती है, क्योंकि अलगाव हताशा ही तो होता है |
प्रश्न: ईश्वर क्या है?
प्रश्न: ईश्वर क्या है?
कृष्णमूर्ति: आप कैसे पता लगाएंगे? क्या आप किसी और की जानकारी को स्वीकार कर लेंगे? या आप खुद यह खोज करने की कोशिश करेंगे कि ईश्वर क्या है? प्रश्न पूछना बहुत सरल है, पर सत्य को अनुभूत करना प्रचुर प्रज्ञा, गहन संवाद तथा खोज की अपेक्षा रखता है |
यह सीधी सी बात है |
जब मैं अपने आप को एक हिंदू, एक ईसाई, एक बौद्ध कहता हूँ – जो कि पूरी की पूरी परंपरा है, परंपरा का बोझ, ज्ञान का बोझ, सरकारों का बोझ है – तो मैं कुछ देख नहीं सकता हूँ, मैं स्पष्ट और सही तरीके से अवलोकन नहीं कर सकता हूँ | इस प्रकार के मन से मैं जीवन को मात्र एक ईसाई, एक बौद्ध, एक हिंदू, एक राष्ट्रवादी, एक साम्यवादी, अथवा किसी अन्य वाद के अनुगामी की दृष्टि से ही देख पाता हूँ, तथा उस तरह की दृष्टि मुझे अवलोकन करने से रोकती है | यह सीधी सी बात है |
We Want Security
There is the desire for security. And one can understand this desire to be secure when you meet a wild animal, a snake; or you watch when you cross the road. But there is no other form of security. Really,if you look at it, there is no other form. You would like to have security with your wife, children, neighbor, your relations—if you have relations—but you don't have it. You may have your mother, you may have your father, but you are not related, you are completely isolated— we will go into that.
हम सुरक्षा चाहते हैं
हममें सुरक्षण की इच्छा रहती है | आप इस इच्छा को तब समझ सकते हैं जब आपका सामना किसी वन्य पशु या सर्प से हो जाता है या सड़क पार करते हुए जब आप एकदम चौकस हो जाते हैं | परंतु सुरक्षा का कोई अन्य स्वरुप नहीं होता | आप अपनी पत्नी के साथ, बच्चों के साथ संबंधों में -- यदि आपके संबंध है तो -- सुरक्षा पाना चाहते हैं, परंतु आपको वह मिल नहीं पाती | आपके माता या पिता आपके साथ हो सकते हैं परंतु साथ होते हुए भी आप उनके साथ नहीं होते, आप पूरी तरह अकेले होते हैं |
Human Consciousness
We were saying that human consciousness is similar in all human beings. Our consciousness, whether we live in the East or West, is made up of any layers of fears, anxieties, pleasures, sorrows and every form of faith. Occasionally, perhaps, in that consciousness there is also love, compassion, and from that compassion a totally different kind of intelligence. And always there is the fear of ending, death.
मानव-चेतना
हम कह रहे थे कि सभी मनुष्य प्राणियों में एक ही मानव-चेतना है | हम पूर्व के निवासी हों या पश्चिम के, हमारी चेतना की अंतर्वस्तु एक ही है : भय, चिंता, सुख, दुख आदि की कई परतें तथा हर प्रकार की आस्था | कभी-कभार शायद उसी चेतना में प्रेम का, करुणा का भी उद्भव हो जाता है | करुणा के साथ एक पूर्णतः भिन्न प्रकार की प्रज्ञा का उदय होता है | और समाप्त होने का, मृत्यु का भय तो हमेशा लगा ही है |
What Is the Purpose of Life?
The significance of life is living. Do we really live, is life worth living when there is fear, when our whole life Is trained in imitation, in copying? In following authority is there living? Are you living when you follow somebody, even if he is the greatest saint or the greatest politician or the greatest scholar?
जीवन का प्रयोजन क्या है?
जीवन की सार्थकता जीने में है | जब हम भयग्रस्त रहते हैं, जब हमारा सारा जीवन अनुकरण करने के लिए नक़ल करते रहने के लिए ढाल दिया गया हो तब हम क्या वास्तव में जी रहे होते हैं, तब क्या वह जीवन जीने योग्य रहता है? किसी प्रामाण्य रूप में स्थापित व्यक्ति का अनुगमन करते जाना क्या जीवन जीना है? जब हम किसी के पिछलग्गू बने हुए हों, चाहे वह बड़े से बड़ा संत हो, राजनेता हो या विद्वान हो, तब क्या हम जी रहे होते हैं?
अनुभव कोई मापन नहीं है
अनुभव कोई मापन नहीं है, यह सत्य की ओर ले जाने वाला मार्ग भी नहीं है | अनुभव आपको, अपने विश्वासों व संस्कारों के अनुसार होते हैं, और विश्वास का तो अर्थ ही स्वयं से पलायन है | मुझे यदि स्वयं को समझना हो, तो मुझे किसी विश्वास की दरकार नहीं है; मुझे केवल स्पष्टता से, बिना किसी चयन के अपना अवलोकन करना होगा, परस्पर संबंधों मैं, पलायनों में, आसक्तियों में स्वयं का निरीक्षण करना होगा |

