Excerpts in General



Without Passion, Life Is Empty


For most of us, passion is employed only with regard to one thing, sex; or you suffer passionately and try to resolve that suffering.

उत्कटता के बिना जीवन खोखला है


हममे से अधिकाँश लोग उत्कटता को एक ही चीज़ से जोड़ कर देखते हैं -- यौनाचार से, या फिर जोड़ते हैं दिलसोज़ यानी दर्दनाक तरीके से दुखी होने और उस दुःख के समाधान का प्रयास करने से |

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Love Cannot Be Thought About


You can think about a person whom you love, but you can-not think about love. Love cannot be thought about; though you may identify yourself with a person, a country, a church, the moment you think about love, it is not love—it is merely mentation...

प्रेम के विषय में सोचा नहीं जा सकता


आप उस व्यक्ति के बारे में सोच सकते हैं जिसे आप प्रेम करते हैं, परंतु आप प्रेम के बारे में नहीं सोच सकते | प्रेम को सोचा नहीं जा सकता | भले ही किसी व्यक्ति, किसी देश, किसी पूजास्थल के साथ आप अभिन्नभाव रखते हों, परंतु जिस पल आप प्रेम के बारे में सोचते हैं वह प्रेम होता ही नहीं है -- वह तो केवल एक मानसिक प्रक्रिया होती है...

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Nature and Earth


Sir, I do not know if you have discovered your relationship with nature. There is no "right" relationship, there is only the understanding of relationship. Right relationship implies the mere acceptance of a formula, as does right thought.

प्रकृति और पृथ्वी


महोदय, मुझे नहीं मालूम की आप प्रकृति से अपना संबंध जान पाए है या नहीं | 'सही' संबंध जैसी कोई चीज़ नहीं होती, होती है केवल संबंध की समझ | सही संबंध में किसी पूर्वनिर्धारित सूत्र के यथावत स्वीकार किया जाना निहित रहता है -- सही विचार ही तरह |

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Family and Society: Relationship or Exclusion?


The family is against society; the family is against human relationship as a whole. You know, it is like living in one part of a big house, in one little room, and making an extraordinary thing of that one little room, which is the family. The family has only importance in relation tothe whole of the house. As that one room is in relation to the whole of the house, so is the family in relation to the whole of human existence.

परिवार और समाज : रिश्ता या अलगाव ?


परिवार समाज-विरुद्ध होता है, परिवार कुल मिलकर मानव-संबंधों के विरुद्ध होता है | देखिये, यह एक विशाल भवन के एक हिस्से में एक कक्ष में रहने जैसा है -- इसी को परिवार कहते है | परिवार का एकमेव महत्व उस सम्पूर्ण भवन के साथ सम्बन्ध से है | उस एक कक्ष का जो संबंध उस पूरे भवन से है, वही संबंध परिवार का संपूर्ण - मानव जाती से है |

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Where There Is Dependency, Attachment, There Is No Love


Psychologically, then, our relationships are based on dependence, and that is why there is fear. The problem is not how not to depend, but just to see the fact that we do depend.

जहाँ निर्भरता व आसक्ति हों, वहां प्रेम नहीं रह सकता


मनोवैज्ञानिक तौर पर हमारे संबंध निर्भरता पर आधारित रहते हैं और इसीलिए इनमें भय का वास रहता है | समस्या यह नहीं है कि निर्भर कैसे न रहें, हमें बस इस तथ्य को देखना है कि हम निर्भर हैं |

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