Excerpts in General



Why Are We Bored?


If you are bored, why are you bored? What is the thing called boredom? Why is it that you are not interested in anything? There must be reasons and causes which have made you dull: suffering, escapes, beliefs, incessant activity, have made the mind dull, the heart unpliable.

हम क्यों ऊबते है?


यदि आप ऊब रहे है तो क्यों ऊब रहे है? वह क्या है जिसे हम ऊब कहते है? ऐसा क्यों है की आप किसी बात में रूचि नहीं रखते? ऐसा होने का कोई कारण, कोई आधार तो होगा जिसने आपको मंद-कुंद बना दिया है | दुःख, पलायन, विश्वास, अनवरत क्रियाकलाप ने आपके मन को कठोर कर दिया है |

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Anger Can Be Self-importance


Anger has that peculiar quality of isolation; like sorrow, it cuts one off, and for the time being, at least, all relationship comes to an end. Anger has the temporary strength and vitality of the isolated. There is a strange despair in anger; for isolation is despair.

क्रोध आत्म-महत्ता से संबंधित है


दुःख की भ्रान्ति क्रोध में भी अलग-थलग कर देने की वह विशेष क्षमता है जो व्यक्ति को सब से काट देती है, और कम से कम कुछ समय के लिए सभी संबंध समाप्त ही हो जाते है | यह क्रोध अलग-थलग व्यक्ति का अस्थायी शक्ति-स्रोत, उसका बल बन जाता है | क्रोध में एक विचित्र प्रकार की हताशा होती है, क्योंकि अलगाव हताशा ही तो होता है |

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Fear Prevents Psychological Freedom


So our first problem, our really essential problem, is to be free from fear. You know what fear does? It darkens the mind. It makes the mind dull. From fear there is violence. From fear there is worship of something.

भय मानसिक स्वतंत्रता में बाधक होता है


अतः हमारी प्राथमिक समस्या, हमारी वास्तविक और अपरिहार्य समस्या है भय से मुक्त होना | क्या आप जानते है की भय करता क्या है? यह मन को अंधकारमय कर देता है, उसे कुंद कर देता है | भय से हिंसा उपजती है | किसी की पूजा भय के कारन ही की जाती है |

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What Is the Purpose of Life?


The significance of life is living. Do we really live, is life worth living when there is fear, when our whole life Is trained in imitation, in copying? In following authority is there living? Are you living when you follow somebody, even if he is the greatest saint or the greatest politician or the greatest scholar?

जीवन का प्रयोजन क्या है?


जीवन की सार्थकता जीने में है | जब हम भयग्रस्त रहते हैं, जब हमारा सारा जीवन अनुकरण करने के लिए नक़ल करते रहने के लिए ढाल दिया गया हो तब हम क्या वास्तव में जी रहे होते हैं, तब क्या वह जीवन जीने योग्य रहता है? किसी प्रामाण्य रूप में स्थापित व्यक्ति का अनुगमन करते जाना क्या जीवन जीना है? जब हम किसी के पिछलग्गू बने हुए हों, चाहे वह बड़े से बड़ा संत हो, राजनेता हो या विद्वान हो, तब क्या हम जी रहे होते हैं?

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How do you know that what you are saying is true?


Reply: Why do you ask me that question? Isn’t it true that as long as there is national division, economic division, racial division, religious division, there must be conflict. That is a fact. Right? Would you accept that?

पहला प्रश्न है आपको कैसे मालूम है कि जो आप कह रहे हैं वह सच है?


आप मुझसे यह सवाल क्यों कर रहे हैं? क्या यह सच नहीं है कि जब तक राष्ट्रीय, आर्थिक, प्रजातीय और धार्मिक विभाजन है, द्वंद्व का होना तय है | यह एक तथ्य है | ठीक? क्या आप इससे सहमत हैं?

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