Excerpts in General



We Are Brought Up To Be Violent


That is a fact: we are violent human beings. From childhood we are brought up to be violent, competitive, beastly to one another. We have never faced the fact.

हम हिंसा के संस्कारों के साथ ही बड़े होते हैं |


हम हिंसक मानव हैं--यह एक तथ्य है | बचपन से ही हमें यह सिखाया जाता है कि हम हिंसक बनें, एक दूसरे के प्रतियोगी बने रहें व पशुवत् व्यवहार करें | पर हमने इस तथ्य का कभी भी सामना नहीं किया है |

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Division Breeds Conflict: That’s A Law


Why is there this division between man and man, between race and race, culture against culture? Why? Religions also have divided man, put man against man—the Hindus, the Muslims, the Christians, the Jews, and so on. This terrible desire to identify oneself with a group, with a flag, with a religious ritual, gives us the feeling that we have roots.

विभाजन द्वंद्व का जनक है : यह नियम है |


आदमी और आदमी के बीच, जाति और जाति के बीच, संस्कृति और संस्कृति के बीच यह विभाजन क्यों है? क्यों? धर्मों ने भी आदमी को बांटा है, आदमी को आदमी के विरोध में खड़ा किया है जैसे हिंदू, मुसलमान, ईसाई, यहूदी आदि | स्वयं को किसी एक समूह के साथ, एक झंडे के साथ, एक धार्मिक परंपरा के साथ पहचान जोड़ने की भयावह इच्छा हमें यह एहसास देती है की हमारा अपना कोई आधार है, अपनी जड़े हैं

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Is God An Invention?


What would you say if you were not conditioned by your religion, by your fears; what would you say about God? Of course, God is a marvellous investment—you can preach about God and you will make a lot of money—as they are doing.

क्या मनुष्य ने ईश्वर को गढ़ लिया है?


इसे आप क्या कहेंगे, यदि आप अपने धर्म, अपने भय के द्वारा अनुकूलित नहीं होते तो आप भगवान के बारे में क्या कहते? जी हां, बिलकुल, भगवान एक आश्चर्यजनक निवेश है--आप भगवान के बारे में प्रवचन कर सकते हैं और इससे आप बहुत अधिक धन कमाँ लेंगे-- जैसे की लोग कर रहे हैं |

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The Crisis Is In You


We are facing a tremendous crisis which the politicians can never solve. Nor can the scientists understand or solve the crisis, nor yet the business world, the world of money. The turning point is not in politics, in religion, in the scientific world; it is in our consciousness.


संकट आपके भीतर ही है |


हम एक भयानक संकट का सामना कर रहे हैं | इस संकट का निवारण करना राजनेताओं के बस की बात नहीं, क्योंकि वे सारे किसी विशिष्ट ढंग से चिंतन करने के लिए पूर्व नियोजित हैं; वैज्ञानिक लोग भी इस संकट का सामना नहीं कर पाएंगे; और न ही व्यापर जगत, न ही धन-दौलत इस मामले में कुछ कर पायेंगे | यह मोड़, यह बदलाव न तो राजनीति के बस की बात है, न ही धर्म के, और न ही विज्ञानं जगत के; यह मसला हमारी चेतना से जुड़ा हुआ है |

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War: A Spectacular, Bloody Projection Of Ourselves


War is merely an outward expression of our inward state, an enlargement of our daily action. It is more spectacular, more bloody, more destructive, but it is the collective result of our individual activities. Therefore you and I are responsible for war, and what can we do to stop it?

युद्ध : दैनिक जीवन का ही बड़ा व्यापक और खूनी प्रक्षेपण


यह हमारी आतंरिक अवस्था की ही एक बाह्य अभिव्यक्ति है, वह हमारे दैनिक कर्म का ही एक विस्त्तार | यकीनन वह एक अधिक व्यापक, अधिक नृशंस, अधिक विध्वंसक है, परंतु है वह हमारी व्यक्तिगत क्रियाओं का ही सामूहिक परिणाम | अतः आप और मैं ही युद्ध के लिए जिम्मेदार हैं | अब प्रश्न है की हम उसे रोकने के लिए क्या कर सकते हैं?

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