Excerpts in General



Are We in Relationship—or Only Our Images?


What do we mean by that word relationship? Are we ever related to anyone, or is the relationship between two images which we have created about each other? I have an image about you, and you have an image about me. I have an image about you as my wife or husband, or whatever it is, and you an image about me also. The relationship is between these two images and nothing else. To have relationship with another is only possible when there is no image.

संबंध हमारे बीच है या केवल हमारी छवियों के बीच ?


इस संबंध शब्द से हमारा अभिप्राय क्या है? किसी से हमारा संबंध रहता भी है या यह हमारे ही द्वारा गढ़ ली गयी दो छवियों के बीच रहता है? मेरे मन में आपकी एक छवि बनी हुई है और आपके मन में मेरी | मेरे मन में आपकी, अपनी पत्नी, पती या अन्य किसी भी तरह की एक छवि बनी हुई है और इसी प्रकार आपने मेरी एक छवि बनायी हुई है | संबंध इन दोनों के बीच ही तो रहहा है, कही और नहीं | संबंध तभी होता है जब कोई छवि निर्मित न हो |

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What Is the Basis for Right Action?


First of all, why do we want to change what is, or bring about a transformation? Why? Because what we are dissatisfies us; it creates conflict, disturbance; and disliking that state, we want something better, something nobler, more idealistic. So, we desire transformation because there is pain, discomfort, conflict.

सम्यक क्रिया का आधार क्या है ?


जो है उसे हम बदलना क्यों चाहते है, रूपांतरित करना क्यों चाहते है? क्यों? क्योंकि हम जो है उससे हम असंतुष्ट रहते है | इससे द्वंद्व और विक्षोभ पैदा होता है | और, इस अवस्था को नापसंद करने के कारन हम कुछ बेहतर, कुछ उत्कृष्ट और अधिक आदर्शपूर्ण की चाहत करने लगते है | अतः इस पीड़ा, बेचैनी और द्वंद्व के चलते हम बदलाव चाहते है |

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Work: How Do You Decide?


Don't you want to find out if it is possible to live in this world richly, fully, happily, creatively without the destructive drive of ambition, without competition? Don't you want to know how to live so that your life will not destroy another or cast a shadow across his path?

कार्य : आप निर्धारित कैसे करते हैं?


क्या आप यह जान लेना नहीं चाहेंगे की इस संसार में महत्वाकांक्षा के विध्वंसक संवेग के बिना और प्रतिस्पर्धा के बिना भी क्या उत्कृष्ठतापूर्वक, सुखपूर्वक और सर्जनात्मक जीवन जीना संभव है? क्या आप नहीं जानना चाहेंगे कि आप कैसे जिएं ताकि आपका जीवन किसी अन्य के जीवन को विनष्ट न करे या किसी अन्य का जीवन-पथ अंधकारमय न कर दे?

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Comparison and Competition, or Cooperation?


One of the things that prevents the sense of being secure is comparison. When you are compared with somebody else in your studies or in your games or in your looks, you have a sense of anxiety, a sense of fear, a sense of uncertainty. So, as we were discussing yesterday with some of the teachers, it is very important to eliminate in our school this sense of comparison, this giving grades or marks,and ultimately the fear of examinations...

तुलना, स्पर्धा या सहयोग?


एक बात जो सुरक्षित होने के भाव में आड़े आती है वह है तुलना| जब आपकी तुलना किसी दूसरे से की जाती है -- आपकी पढ़ाई के बारे में, आपके खेलकूद के बारे में अथवा आपके रूप या चेहरे के बारे में -- तब आप व्यग्रता, घबराहट और अनिश्चितता के भाव से भर जाते हैं | इसलिए जैसा की कल हम कुछ अध्यापकों के साथ चर्चा कर रहे थे, यह नितांत आवश्यक है की हमारे विद्यालय में तुलना का यह एहसास, यह अंक या श्रेणी देना और सबसे बड़ा तो परीक्षा का भूत समाप्त किया जाए |

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The Right Kind of Education


The ignorant man is not the unlearned, but he who does not know himself, and the learned man is stupid when he relies on books/ on knowledge, and on authority to give him understanding. Understanding comes only through selfknowledge, which is awareness of one's total psychological process. Thus education, in the true sense, is the understanding of oneself, for it is within each one of us that the whole of existence is gathered.

सही शिक्षा


अज्ञानी व्यक्ति वह नहीं है जिसने ककहरा नहीं सीखा है बल्कि वह है जो स्वयं को नहीं जानता, और एक विद्वान व्यक्ति तब मूर्ख हो जाता है जब वह समझ के लिए ग्रंथों पर, ज्ञान पर या किसी मान्यताप्राप्त व्यक्ति पर निर्भर करने लगता है | समझ तो केवल आत्मपरिचय से आती है, स्वबोध से आती है अर्थात अपने भीतर की सम्पूर्ण मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया के प्रति सजगता से | इस प्रकार सही अर्थों में शिक्षा है स्वयं को समझना, क्योंकि हम में से प्रत्येक में सम्पूर्ण अस्तित्व समाया है |

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