J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)







Question: How can we be free from indignation?


Krishnamurti: What do you mean by indignation? You mean when a man beats a heavily laden donkey, you feel angry? You say you feel righteously angry when some big man beats a little boy. Is there such a thing as righteous indignation?

प्रश्न : रोष से मुक्त होने का क्या तरीका है?


कृष्णमूर्ति : रोष से आपका आशय क्या है? क्या आपका आशय यह है कि जब कोई आदमी भारी बोझ से लदे गधे को पीटता है तो उसे देखकर आपको गुस्सा आता है? आप कहते हैं कि जब कोई बड़ा आदमी किसी छोटे से बच्चे को पीटता है तो आपको गुस्सा आना उचित है | क्या उचित क्रोध जैसी कोई चीज़ वास्तव में होती है?

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Initiative


We have been talking about fear, and I think if we can go more deeply into it, perhaps we shall awaken to initiative. Do you know what that word initiative means? To initiate means to begin. I will explain further as I go along.

पहल


हम लोग भय के बारे में चर्चा करते रहे हैं और मेरा विचार है कि यदि हम इसमें और गहराई तक जा सकें, तब शायद हममें पहलकदमी के बारे में समझ उजागर हो पाए | क्या आप जानते हैं कि पहल करने का अर्थ क्या होता है? पहल करना यानी अपनी ओर से शुरुआत करना | जैसे-जैसे मैं इस पर बातचीत करूँगा, मैं इसे और भी स्पष्ट करता चलूँगा |

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Question: How can we remove our defects forever?


Krishnamurti: You see how the mind wants to be secure. It does not want to be disturbed. It wants forever and forever to be completely safe, and a mind that wants to be completely safe, to get over all difficulties forever and forever, is going to find a way.

प्रश्न : हम अपने दोषों को हमेशा के लिए कैसे दूर कर सकते हैं?


कृष्णमूर्ति : आप यह देख सकते हैं कि मन किस प्रकार से सुरक्षित रहना चाहता है | यह किसी प्रकार का व्यवधान नहीं चाहता | यह सदा-सदा के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित बना रहना चाहता है, और ऐसा मन जो पूरी तरह से सुरक्षित बना रहना चाहता है जो हमेशा के लिए अपनी कठिनाइयों को मिटा देना चाहता है, अवश्य ही इसके लिए कोई उपाय खोज लेगा |

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Question: Why do we get angry?


Krishnamurti: It may be for many reasons. It may be due to ill-health, to not having slept properly, to not having the right kind of food. It may be purely a physical reaction, a nervous reaction, or it may be much deeper.

प्रश्न : हमें क्रोध क्यों आता है?


कृष्णमूर्ति : इसके कई कारण हो सकते हैं | स्वास्थ्य कि गड़बड़ी के कारण ऐसा हो सकता है, पर्याप्त नींद न होने से ऐसा हो सकता है, उचित प्रकार का भोजन न करने से ऐसा हो सकता है | यह शारीरिक प्रतिक्रिया का एक प्रकार हो सकता है, उत्तेजना के कारण संभव है या इसका कोई अधिक गहरा कारण भी हो सकता है |

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Prejudice has something in common


Prejudice has something in common with ideals, beliefs and faiths. We must be able to think together; but our prejudices, our ideals and so on, limit the capacity and the energy required to think, to observe and examine together so as to discover for ourselves what lies behind
all the confusion, misery, terror, destruction and tremendous violence in the world.

पूर्वाग्रहों में और आदर्शों, विश्वासों, आस्थाओं में कुछ समानता हुआ करती है |


पूर्वाग्रहों में और आदर्शों, विश्वासों, आस्थाओं में कुछ समानता हुआ करती है | पूर्वाग्रह, आदर्श और ऐसी तमाम बातें, मिलजुल कर सोचने, देखने-परखने की हमारी क्षमता तथा ऊर्जा को प्रतिबंधित कर देती हैं, सीमित कर देती हैं, और इस कारण हम यह पता नहीं कर पाते हैं की इस संसार मैं फैले विभ्रम, पीड़ा, आतंक, विनाश तथा भयानक हिंसा आदि के पीछे असल मुद्दा क्या है |

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