Excerpts in General



Escape from What Is Makes for Slavery


To escape collectively is the highest form of security. In facing what is, we can do something about it; but to take flight from what is inevitably makes us stupid and dull, slaves to sensation and confusion.

जो है से पलायन दासता का कारक होता है


सामूहिक रूप से पलायन करना सुरक्षा का ज़बरदस्त तरीका होता हे | 'जो हे' उसका सामना करने में हम तत्संबंधी कुछ कर सकते है, परंतु उससे पलायन निश्चित रूप से हमें जड़मति और कुंद बना देता है, संवेग और विभ्रम का दास बना देता है |

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The Still Mind


And it is only a very still mind not a disciplined mind, that has understood and therefore is free. It is only that still mind that can know what is creation. Because the word God has been spoiled...

शांत व स्थिर मन


अनुशासनबद्ध मन नहीं बल्कि केवल शांत मन ही समझ पता है, और इसीलिए वह मुक्त हो रहता है | केवल ऐसा शांत मन ही जान सकता है की सृजन क्या होता है, क्योंकि 'ईश्वर' शब्द तो विकृत किया जा चुका है |

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When You Are Eating, Eat


Questioner: I feel that my daily life is unimportant, that I should be doing something else.

भोजन करते समय, भोजन ही कीजिये


प्रश्नकर्ता: मैं महसूस करता हूँ की मेरा दैनिक जीवन महत्वहीन है और मुझे लगता है की मुझे कुछ और करना चाहिए |

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Meditation Means to Pay Attention


Not to seek any form of psychological security, any form of gratification,
requires investigation, constant watchfulness to see how the mind operates, and surely that is meditation, is it not?

ध्यान का अर्थ है अवधान


किसी भी प्रकार की मनोवैज्ञानिक सुरक्षा की, किसी भी तरह के तुष्टीकरण की चाहना न हो, इसके लिए दरकार होती है मन कैसे काम करता है इसका गहन अवलोकन करने की, सतत सजगता की; और निश्चित ही यही ध्यान है, है न?

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Truth; God; Death


Death awaits each one of us, whether we like it or not. You may be a high government official with titles, wealth, position, and a red carpet, but there is this inevitable thing at the end of it. So what do we mean by death?

सत्य, ईश्वर, मृत्यु


हम चाहें या न चाहें, मृत्यु सदैव हमारी प्रतीक्षा में रहती है | आप भले ही अनेक उपाधियों से अलंकृत कोई उच्च सरकारी अधिकारी हों या धन-संपदा, प्रतिष्टा, मान-सम्मान से विभूषित कोई व्यक्ति हों, परंतु सब के अंतिम छोर पर यह अपरिहार्य मृत्यु उपस्थित रहती है | तो, मृत्यु से हमारा अभिप्राय क्या है?

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